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मृत्युंजय शिव मंत्र — अर्थ और लाभ

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pushti-Vardhanam Urvarukamiva Bandhanan Mrityor-Mukshiya Maamritat

अर्थ

महामृत्युंजय मंत्र। मृत्यु भय, रोग, दुर्घटना से रक्षा।

जप संख्या
108
श्रेष्ठ समय
संध्या

लाभ

मृत्यु भय व गंभीर बीमारी से रक्षा करता है, स्वास्थ्य लाभ में सहायक है, और दीर्घायु व समग्र स्वास्थ्य हेतु जपा जाता है।

महत्व

किंवदंती है कि मार्कंडेय ऋषि ने इस मंत्र को जपकर मृत्यु के देवता यम पर विजय पाई और दीर्घायु प्राप्त की — बीमारी में यह आज भी सर्वप्रमुख मंत्र है।

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