10 पोरुथम विवाह मिलान क्या है?
दक्षिण भारतीय परंपरा में वर और वधू के जन्म नक्षत्र के आधार पर दस पोरुथम देखे जाते हैं: दिनम, गण, महेंद्र, स्त्री दीर्घ, योनि, राशि, राशि स्वामी, वश्य, रज्जु और वेध। दोनों का जन्म विवरण डालें — टूल नक्षत्र निकालकर बताएगा कि कौन से पोरुथम मिलते हैं।
कौन से पोरुथम सबसे ज़रूरी हैं?
रज्जु सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है — रज्जु न मिलना परंपरा से बड़ी बाधा माना जाता है। दिनम, गण, योनि और राशि को भी अधिक महत्व दिया जाता है। अंतिम निर्णय से पहले मंगल दोष सहित दोनों कुंडलियों की विस्तृत जाँच करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विवाह के लिए कितने पोरुथम पर्याप्त हैं?
कई परिवार रज्जु मिलने के साथ दस में से कम से कम 6 पोरुथम देखते हैं, पर अंतिम निर्णय में पूरी कुंडली भी देखी जाती है।
क्या यह उत्तर भारतीय अष्टकूट (36 गुण) मिलान है?
नहीं। अष्टकूट आठ कूटों को 36 गुणों में आँकता है। यह पेज दक्षिण भारतीय दस पोरुथम पद्धति इस्तेमाल करता है।
अगर सही जन्म समय पता न हो?
पोरुथम मुख्य रूप से जन्म नक्षत्र पर निर्भर है। अगर जन्म के दिन चंद्रमा ने नक्षत्र बदला हो, तो समय से ही नक्षत्र तय होगा — इसलिए समय जितना हो सके सही डालें।