मंगल महादशा फल: 7 साल कुछ कर दिखाने के
मंगल ग्रहों के सेनापति हैं। उनकी 7 साल की महादशा का अपना ही रंग होता है – काम तेज़ी से होते हैं, धैर्य थोड़ा कम हो जाता है और लंबे समय से टाले जा रहे फैसले लेने की हिम्मत अचानक आ जाती है। बहुत से लोगों ने पहला घर, पहला कारोबार या पहली बड़ी जीत मंगल दशा में ही पाई है।
इस लेख में जानिए मंगल महादशा के फल, मांगलिक दोष से इसका अंतर, सभी 9 अंतर्दशाएँ और असरदार उपाय।
विंशोत्तरी दशा क्रम में यह दशा चंद्र महादशा के बाद आती है और इसके समाप्त होने पर राहु महादशा शुरू होती है। इन दोनों के विस्तृत फल भी अवश्य पढ़ें।
मंगल किसका कारक है?
मंगल ऊर्जा, साहस, प्रतिस्पर्धा, छोटे भाई-बहन, भूमि, संपत्ति, इंजीनियरिंग, सर्जरी, पुलिस, सेना और खेल का कारक है। शरीर में रक्त और मांसपेशियाँ मंगल से जुड़ी हैं। मंगल को भूमि पुत्र कहा जाता है, इसीलिए ज़मीन-जायदाद से उसका गहरा संबंध है। मंगल अपनी स्थिति से 4, 7 और 8वें भाव को देखता है।
मंगल महादशा कब शुभ होती है?
- मंगल मेष या वृश्चिक में हो या मकर में उच्च का हो।
- मंगल 3, 6, 10 या 11वें भाव में हो; दशम भाव में उसे दिग्बल मिलता है।
- कर्क और सिंह लग्न के लिए मंगल योगकारक है; मेष, वृश्चिक, धनु, मीन लग्न के लिए भी प्रायः शुभ।
- गुरु का साथ या चंद्रमा के साथ चंद्र-मंगल योग हो।
कब सावधानी ज़रूरी है: कर्क में नीच का मंगल, 8वें या 12वें भाव का मंगल या शनि-राहु के साथ मंगल दुर्घटना, सर्जरी, संपत्ति विवाद, कानूनी परेशानी और गुस्से की समस्या दे सकता है।
करियर और धन: पुलिस, सेना, खेल, इंजीनियरिंग, निर्माण, रियल एस्टेट और सर्जरी जैसे क्षेत्रों में तेज़ तरक्की होती है। अपना काम शुरू करने के लिए भी अच्छा समय, बशर्ते योजना पक्की हो।
रिश्ते और सेहत: जोश बढ़ता है – प्रेम विवाह भी होते हैं और बहसें भी। कटने-जलने, बुखार और ब्लड प्रेशर का ध्यान रखें; व्यायाम सबसे अच्छा उपाय है।
मंगल महादशा: एक नज़र में
| अवधि | 7 वर्ष |
|---|---|
| पहले आने वाली दशा | चंद्र महादशा |
| बाद में आने वाली दशा | राहु महादशा |
| नक्षत्र | मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा |
| स्वराशि | मेष, वृश्चिक |
| उच्च / नीच | मकर / कर्क |
| वार | मंगलवार |
| रत्न | मूंगा |
मंगल महादशा किस उम्र में आती है?
आयु आपके जन्म नक्षत्र और जन्म के समय बची हुई दशा पर निर्भर करती है। नीचे दी गई आयु केवल अनुमानित है; सटीक तिथि अपनी कुंडली में देखें।
| मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा | जन्म से ही |
|---|---|
| रोहिणी, हस्त, श्रवण (चंद्र) | लगभग 10 वर्ष की आयु से पहले |
| कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा (सूर्य) | लगभग 10 से 16 वर्ष |
| भरणी, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा (शुक्र) | लगभग 16 से 36 वर्ष |
| अश्विनी, मघा, मूल (केतु) | लगभग 36 से 43 वर्ष |
| आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती (बुध) | लगभग 43 से 60 वर्ष |
| पुष्य, अनुराधा, उत्तरा भाद्रपद (शनि) | लगभग 60 से 79 वर्ष |
| पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वा भाद्रपद (गुरु) | लगभग 79 वर्ष के बाद |
मंगल महादशा में सभी 9 अंतर्दशाओं के फल
हर अंतर्दशा का फल इस बात पर निर्भर करता है कि उसका स्वामी आपकी कुंडली में कितना बलवान है। इसलिए हर अवधि के शुभ और सावधानी वाले दोनों पक्ष दिए गए हैं।
1. मंगल महादशा में मंगल अंतर्दशा (4 माह 27 दिन)
दशा की शुरुआत; ऊर्जा चरम पर।
शुभ फल: संपत्ति खरीद, प्रतियोगिता में जीत और भाई-बहनों का साथ।
सावधानी: छोटा गुस्सा, बुखार, छोटी चोटें और बहस।
2. मंगल महादशा में राहु अंतर्दशा (1 वर्ष 18 दिन)
दशा का सबसे जोखिम भरा दौर।
शुभ फल: साहसिक कदम सफल, विदेश या तकनीकी अवसर और प्रतिद्वंद्वियों पर जीत।
सावधानी: दुर्घटना, आग या बिजली का खतरा, कानूनी परेशानी और जल्दबाज़ी के फैसले।
3. मंगल महादशा में गुरु अंतर्दशा (11 माह 6 दिन)
अक्सर सबसे अच्छा दौर।
शुभ फल: विवाह, संतान, उच्च शिक्षा, संपत्ति, पदोन्नति और सही मार्गदर्शन।
सावधानी: अति आत्मविश्वास, बच्चों की चिंता और वज़न बढ़ना।
4. मंगल महादशा में शनि अंतर्दशा (1 वर्ष 1 माह 9 दिन)
आग और बर्फ का मेल।
शुभ फल: निर्माण, मशीनरी, लोहा और उद्योग में मेहनत का फल।
सावधानी: कार्यस्थल पर टकराव, हड्डी-जोड़ों की चोट, ऑपरेशन और संपत्ति के मुकदमे।
5. मंगल महादशा में बुध अंतर्दशा (11 माह 27 दिन)
मंगल बुध को पसंद नहीं करता; वाणी पर ध्यान रखें।
शुभ फल: व्यापार, इंजीनियरिंग, आईटी, परीक्षा और नए अनुबंधों में सफलता।
सावधानी: कड़वे शब्द, बहस, कागज़ी गलती और नसों का तनाव।
6. मंगल महादशा में केतु अंतर्दशा (4 माह 27 दिन)
केतु मंगल जैसा ही है, इसलिए साहस दोगुना।
शुभ फल: सर्जन, रिसर्च और साधना करने वालों के लिए अच्छा समय।
सावधानी: चोट, बुखार, अचानक स्थान परिवर्तन और भाई-बहनों से दूरी।
7. मंगल महादशा में शुक्र अंतर्दशा (1 वर्ष 2 माह)
दशा की सबसे लंबी अंतर्दशा।
शुभ फल: प्रेम, विवाह, वाहन, घर की सजावट और कला में सफलता।
सावधानी: जीवनसाथी से बहस, फिज़ूलखर्ची और किडनी संबंधी परेशानी।
8. मंगल महादशा में सूर्य अंतर्दशा (4 माह 6 दिन)
सूर्य और मंगल मित्र हैं।
शुभ फल: सरकारी काम, अधिकार, नेतृत्व और पिता का सहयोग।
सावधानी: गर्मी, बुखार, सिरदर्द और बॉस से टकराव।
9. मंगल महादशा में चंद्र अंतर्दशा (7 माह)
दशा का आखिरी दौर; आगे 18 साल की राहु महादशा।
शुभ फल: धन, संपत्ति, घर में शांति और यात्रा से लाभ।
सावधानी: भावुक फैसले, माँ की सेहत और पानी से जुड़ी सावधानी।
क्या मंगल महादशा और मांगलिक दोष एक ही हैं?
नहीं। मांगलिक दोष का मतलब है कुंडली में मंगल का 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में होना, जिसे विवाह मिलान में देखा जाता है। मंगल महादशा 7 साल की दशा अवधि है। मांगलिक व्यक्ति की मंगल दशा बहुत अच्छी जा सकती है और गैर-मांगलिक की कठिन – सब कुछ मंगल के भावेश होने और बल पर निर्भर करता है। स्वराशि, उच्च का मंगल या गुरु की दृष्टि जैसे कई योग मांगलिक दोष को कम भी करते हैं।
मंगल महादशा के उपाय
- मंगलवार पूजा: मंगलवार को हनुमान जी या भगवान कार्तिकेय को लाल फूल चढ़ाएँ और हनुमान चालीसा पढ़ें।
- मंगल मंत्र: "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः" का 108 बार जाप करें।
- दान: मसूर की दाल, गुड़ या लाल कपड़ा दान करें; रक्तदान भी बहुत अच्छा आधुनिक उपाय है।
- व्यावहारिक उपाय: रोज़ व्यायाम करें, गुस्से पर काबू रखें और भाई-बहनों से अच्छे संबंध रखें।
- रत्न पर सावधानी: मूंगा तभी पहनें जब मंगल आपकी कुंडली में शुभ हो।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मंगल महादशा कितने साल की होती है?
मंगल महादशा 7 साल की होती है। यह चंद्र महादशा के बाद आती है और इसके बाद 18 साल की राहु महादशा शुरू होती है।
क्या मंगल महादशा में घर खरीदना अच्छा है?
मंगल भूमि का कारक है, इसलिए अगर मंगल और चतुर्थ भाव मज़बूत हों तो यह संपत्ति खरीदने का बहुत अच्छा समय है।
मंगल महादशा में कौन सी अंतर्दशा अच्छी है?
मंगल में गुरु, मंगल में चंद्र और मंगल में सूर्य की अंतर्दशा आमतौर पर सबसे अच्छी मानी जाती है।
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- शनि महादशा फल
- बुध महादशा फल
अस्वीकरण: यह लेख पारंपरिक वैदिक ज्योतिष पर आधारित सामान्य फल बताता है। हर कुंडली अलग होती है। महत्वपूर्ण निर्णय से पहले अनुभवी ज्योतिषी से और स्वास्थ्य संबंधी विषयों में डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
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